ऐ काश की ओ पल फिर आये
कुछ तुम जी लो, कुछ मै जी लू !
वो मधुर सुहाने चंचल पल
कुछ तुम चुन लो, कुछ मै चुन लू !!
फिर वही सुहाने मौसम हो,
फिर वही गीत मनभावन हो !
कुछ कस्मे हो, कुछ वादे हो,
कुछ तुम बोलो , कुछ मै बोलू!!
मै वही राग फिर से छेडू ,
तुम वही गीत फिर से गाओं !
तुम रूठो फिर बिन बातो पे,
वो तेरे भोलेपन पे मै फिर से जी लू फिर से मर लू
फिर वो ही चाँद फलक पे हो ,
फिर वही बेताबी सीने में !
तुम हँसती रहो बस हँसती रहो ,
मै तुम्हे देख खुश होता रहू !!
फिर बारिश कि कुछ बुँदे हो,
सावन का पुरवा झोका हो !
हाथो में तेरा हाथ लिए ,
कुछ तुम भिगो, कुछ मै भीगू !!
ऐ काश की ओ पल फिर आये
कुछ तुम जी लो, कुछ मै जी लू

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